राष्ट्रीय आयोग की स्थापना करने के पीछे क्या मकसद था?

राष्ट्रीय आयोग की स्थापना करने के पीछे क्या मकसद था?

भाषाओं में अनुवाद, प्रकाशित अनुवादों के बारे में सूची तैयार करने, अनुवाद के साधनों, उपकरणों का विकास करके सूचना का भंडार बनाना ।।
• अनुवाद अध्ययनों के मुद्रित व वेब पर प्रकाशन को बढ़ावा देना ।
अनुवाद के विभिन्न साधनों का विकास जैसे शब्दकोश, विभाषीय शब्दकोश, डिजीटल साधन, अनुवाद हेतु सॉफ्टवेयर, मशीन अनुवाद आदि । अनुवादकों हेतु उत्तम शिक्षण व प्रशिक्षण व्यवस्था ।
• प्राथमिक से स्नातक स्तर की शिक्षण सामग्री का अनुवाद ।।
भारतीय भाषाओं और साहित्य को दक्षिण एशिया व बाहर के देशों में प्रचारित करना । राष्ट्रीय बेवपोर्टल तैयार करना, वार्षिक सम्मेलन आयोजित करना, पुरस्कारों को बढ़ावा देना ।

4. पुस्तकालय :

पुस्तकालयों के लिये राष्ट्रीय आयोग की स्थापना करना । सभी पुस्तकालयों की राष्ट्रीय गणना की तैयारी करना ।
पुस्तकालय सूचना सेवा, शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान सुविधाओं में सुधार करना ।

• केन्द्रीय पुस्तकालय कोष की स्थापना करना ।

पुस्तकालयों में कर्मचारियों की आवश्यकता का आकलन करना । पुस्तकालय प्रकथन को आधुनिक बनाना । पुस्तकालय प्रबन्धन में समुदाय को अधिक प्रोत्साहन देना । सभी पुस्तकालयों में सूचना संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग को बढ़ावा देना । निजी संग्रहों का संरक्षण व दान को सुविधापूर्ण बनाना । पुस्तकालय और सूचना सेवाओं के विकास में सरकारी निजी साझेदारी को बढ़ावा देना ।

5. ज्ञान का नेटवर्क :

रा.ज्ञा.आ. ने 6 माह तक अध्ययन करने के बाद यह माना कि विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान की रचना और प्रसार में लगी संस्थाओं जैसे अनुसंधान प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों उच्च शिक्षण, संस्थानों, व्यावसायिक संस्थानों की क्षमताओं के अधिकतम उपयोग हेतु उन्हें तेज गति वाले बॉड बैण्ड नेटवर्क से जोड़ना अत्यधिक आवश्यक है । इस हेतु मेगाबाइट क्षमताओं वाला राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क बनाया जाना चाहिये । इसके लिये 5000 केन्द्र बनाये जाने चाहिये व प्रारम्भ में 500 से 1000 केन्द्रों को जोड़ने का लक्ष्य लेकर कार्य आरम्भ कर दिया जाना चाहिये ।

6. स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क :

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग द्वारा स्वास्थ्य देखभाल में आई.टी. के प्रयोग का अध्ययन करने के लिये डी.एन.के. गाँगुली, अध्यक्ष, भारतीय चिकित्सीय अनुसंधान परिषद की अध्यक्षता में एक कार्यकारी दल गठित किया गया । इस दल के अध्ययन के आधार पर राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशें इस प्रकार है। भारतीय स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क के विकास की शुरूआत की जानी चाहिये ।
• स्वास्थ्य सूचना विज्ञान के लिये राष्ट्रीय मानकों का निर्माण किया जाना चाहिये ।
• व्यक्ति के जन्म से मृत्यु तक का स्वास्थ्य सम्बन्धी सभी घटनाक्रम के रिकार्ड हेतु ई.एच.आर. का सृजन करें। स्वास्थ्य देखभाल में आई टी के प्रयोग को प्रोत्साहन दें । चिकित्सीय सूचना विज्ञान, चिकित्सीय और अर्द्ध-चिकित्सीय पाठ्यचर्या का अंग होना चाहिये । पोर्टल : इंटरनेट जानकारी और ज्ञान को एक सशक्त और लोकतांत्रिक साधन के रूप में विकसित करने हेतु वेवपोर्टलों की एक श्रृंखला तैयार की जानी चाहिये । बुनियादी जरूरतों जैसे जल, ऊर्जा, पर्यावरण, शिक्षा, खाद्य, कृषि, रोजगार आदि के बारे में राष्ट्रीय वेब आधारित पोर्टल स्थापित किये जाने चाहिये ।।

8. स्कूली शिक्षा :

उत्तम स्कूली शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने के लिये प्रारम्भिक व माध्यमिक स्तरों पर बड़े पैमाने पर विस्तार करना होगा । प्राथमिक व माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिये काफी संवर्धित खर्च की आवश्यकता है । ऊपर से नीचे के स्तर तक सरकारी निधियों के लचीले वितरण व स्थानीय प्रबन्ध को अधिक स्वायत्तता प्रदान की जानी चाहिये । निजी स्कूलों की मान्यता, सरकार से रच-वित्त पोषी स्कूलों को सहायता व स्कूल प्रबन्धक वर्ग की क्षमता हेतु पारदर्शी, मानदण्ड आधारित सरल क्रियाविधियाँ होनी चाहिये । साक्षरता मिशन पर व्यय बढ़ाया जाना चाहिये । स्कूल पूर्व शिक्षा सर्व सुलभ बनाई जानी चाहिये । स्कूल व स्कूल आयु के बच्चों के बारे में पूर्ण डाटा आधार का निर्माण किया जाना चाहिये । अधिगम उपलब्धियों के लिये न्यूनतम मानकों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिये सरकारी व निजी स्कूलों की गुणवत्ता की मॉनीटरिंग करने के लिये एक राष्ट्रीय निकाय बनाया जाना चाहिये । स्कूल निरीक्षण की प्रणाली में स्थानीय हितधारकों की भूमिका को बढ़ाना व चुस्त बनाया जाना चाहिये। साथ ही राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने रट्टा लगाकर सीखने से हटकर अवधारणाओं की गहरी समझ व योग्यता में सुधार की तरफ बढ़ते हुए पाठ्यचर्या और परीक्षा प्रणालियों में सुधार सम्बन्धी सिफारिशें भी दी हैं ।

9. व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण:

रा.ज्ञा.आ व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण को देश की शिक्षानीति का एक महत्वपूर्ण अंग मानता है देश की बदलती स्थिति में व युवा आबादी का लाभ उठाने की दृष्टि से व्यावसायिक शिक्षा में तत्काल सुधार आवश्यक है जैसे – व्यावसायिक शिक्षा को पूरी तरह मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय के अंतर्गत रखना। व्यावसायिक शिक्षा का प्रभाव मापना, उसकी निगरानी करना, शिक्षा व प्रशिक्षण में लचीलापन लाना।। वर्तमान ढाँचे को मजबूत करना व शिक्षा के लिये संसाधनों का आवंटन करना । नवाचारी आपूर्ति मॉडलों के माध्यम से जिनमें सशक्त सरकारी व निजी भागीदारी शामिल है। इनकी क्षमता में वृद्धि पर बल हमारी अधिकांश कामकाजी आबादी की उत्पादकता बढ़ाने की दृष्टि से असंगठित तथा अनौपचारिक क्षेत्र के लिये उपलब्ध प्रशिक्षण विकल्पों का संवर्धन महत्वपूर्ण होगा । व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण को समुचित प्रमाणन सहित एक मजबूत नियामक व प्रत्यायन तंत्र सुनिश्चित करना जरूरी

10. उच्च शिक्षा :

उच्चतर शिक्षा में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशें विस्तार, उत्कृष्टता, समावेशन – इन तीनों पक्षों की ओर केन्द्रित है । विस्तार हेतु 2015 तक 1500 विश्वविद्यालय, 50 राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, खोले जाने चाहिये । उत्कृष्टता हेतु मौजूदा विश्वविद्यालयों में सुधार, अवर स्नातक कॉलेजों का ढाँचा बदलना, प्रवेश की बाधाओं को कम करने हेतु एक स्वतंत्र विनियामक प्राधिकरण की स्थापना की सिफारिश की है। पाठ्यचर्या संशोधन, पाठ्यक्रम क्रेडिट प्रणाली, आंतरिक मूल्यांकन पर अधिक विश्वास करना, संस्थान के अभिशासन में सुधार, सामुदायिक कॉलेजों के मॉडलों के सृजन की सिफारिश भी की है । समावेशन की दृष्टि से रोजगारोन्मुख कार्यक्रम सभी योग्य विद्यार्थियों को शिक्षा सुलभ होनी चाहिये भले ही उनकी सामाजिक, आर्थिक स्थिति कैसी भी हो ।

11. गणित व विज्ञान में अधिक प्रतिभाशाली छात्र :

देश में गणित व विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान में नवीनीकरण करने के लिये राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिश है कि गणित तथा विज्ञान की शिक्षा हेतु अधिक संख्या में विद्यार्थियों को आकृष्ट किये जाने की आवश्यकता है । इस हेतु मौजूदा अधिकारिक तंत्र का स्तरोन्नयन एवं विस्तार हेतु निवेश बढ़ाने, संसाधनों का आदान-प्रदान, सभी स्तरों पर अध्यापक प्रशिक्षण को उत्तम गुणवत्तायुक्त बनाने, मूल्यांकन प्रणाली में आधारभूत बदलाव, स्वायत्तता, छात्रवृत्तियाँ, पाठ्यचर्या में बदलाव व विश्वस्तरीय सुधार, अनुसंधान के अवसरों में बढ़ोतरी, उत्तम विज्ञान शैक्षिक सामग्री की सर्वसुलभता को बढ़ाना आदि सिफारिशें प्रस्तुत की । रा.शा.आ. ने एक विशाल विज्ञान आउटरीच कार्यक्रम शुरू किये जाने की भी सिफारिश की है ।।

12. विधिक शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, प्रबंधन शिक्षा, इंजीनियरिंग शिक्षाः

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने पेशेवर शिक्षा जैसे विधिक, चिकित्सा, प्रबंधन व इंजीनियरिंग शिक्षा हेतु मौजूदा विनियामक तंत्र में सुधार अथवा इनके स्थान पर स्थायी स्वायत्त समितियों की स्थापना की सिफारिश की है । ऐसी स्वतंत्र एजेन्सियाँ भी विकसित की जानी चाहिये जो विश्वसनीय रेटिंग उपलब्ध कराती हैं । पेशेवर शिक्षा में पाठ्यचर्या में सुधार एवं विकास, अनुसंधानों में वृद्धि मौजूदा परीक्षा प्रणाली में सुधार, संस्थानों को अधिक स्वायत्तता प्रदान करने, क्षेत्रीय संतुलन, प्रतिभा सम्पन्न संकाय को आकर्षित करने, अन्र्तराष्ट्रीयकरण करने हेतु अधिक वित्तीय व्यवस्था करने सम्बन्धी सिफारिश दी दें ।

13. मुक्त और दूरस्थ शिक्षा तथा मुक्त शैक्षिक संसाधन :

उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाले छात्रों में से 1/5 से अधिक विद्यार्थी मुक्त व दूरस्थ शिक्षा के हैं । रा.जा.आ. ने इस हेतु एक राष्ट्रीय आईसीटी आधिकारिक तंत्र का सृजन करने, विनियामक तंत्रों में सुधार लाने, वेब आधारित साझा मुक्त संसाधन विकसित करना, क्रेडिट बैंक स्थापित करना, राष्ट्रीय परीक्षण सेवा उपलब्ध कराना, अनुसंधान लेखा पुस्तकों, पत्रिकाओं आदि की मुक्त सुलभता संबंधी सिफारिशें दी हैं ।

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