गुणवत्तायुक्त प्राथमिक शिक्षा के लिए केन्द्रीय शैक्षिक परामर्श बोर्ड द्वारा क्या क्या सुझाव दिये गए?

गुणवत्तायुक्त प्राथमिक शिक्षा के लिए केन्द्रीय शैक्षिक परामर्श बोर्ड द्वारा क्या क्या सुझाव दिये गए?

– केन्द्रीय शैक्षिक परामर्श बोर्ड गठित किया गया जो इस अधिनियम का स्वरूप निर्धारित कर सके व इसे लोकतांत्रिक समाज हेतु वास्तविक एवं व्यावहारिक रूप प्रदान कर सके। भारतीय विधि आयोग ने निजी विद्यालयों में अलाभान्वित बालकों हेतु 50% आरक्षण का सुझाव दिया । जुलाई 2005 में केन्द्रीय शैक्षिक परामर्श बोर्ड (Central Advisory Board of Education) ने यह अधिनियम पूर्ण रूप से तैयार करके मानवीय संसाधन एवं विकास मंत्रालय को प्रस्तुत किया । मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा यह विधेयक राष्ट्रीय परामर्श परिषद् (National Advisory Council) को भेजा गया । इसकी अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी हैं ।

राष्ट्रीय परामर्श परिषद

– राष्ट्रीय परामर्श परिषद के दवारा यह विधेयक प्रधानमंत्री के अवलोकन हेतु भेजा गया । – 19 जुलाई 2006 को शिक्षा के अधिकार से जुड़े सभी संगठनों की संयुक्त बैठक बुलाई गई जिसमें संसदीय कार्यवाही व निर्देशों की आवश्यकता व निर्धारण हेतु निर्णय लिये गये।
2 जुलाई 2009 को यह विधेयक केन्द्रीय मंत्रीमण्डल (Cabinet) द्वारा अनुमोदित कर दिया गया ।
– 20 जुलाई 2009 को राज्यसभा द्वारा इसे पारित कर दिया गया ।
– 4 अगस्त 2009 को लोकसभा द्वारा भी इसे पारित कर दिया गया ।
– 3 सितम्बर 2009 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के पश्चात यह अधिनियम बन गया ।
– 1 अप्रेल 2010 को यह अधिनियम जग व कश्मीर राज्य को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में लागू हो गया । भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि “शिक्षा का अधिकार अधिनियम” संसद में प्रधानमंत्री के भाषण द्वारा लाया गया । प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में कहा |
We are committed to ensuring that all children, irrespective of gender and social category, have access to education. An education that enables them to acquire the skills, knowledge, values and attitudes necessary to become responsible and active citizens of India,”

“शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 भारत में लागू होने के पश्चात भारत विश्व के उन 135 देशों में सम्मिलित हो गया है जिनमें शिक्षा के अधिकार को मूल अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है ।

18.3.3 शिक्षा का अधिकार अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ

बच्चों के लिए मुफ्त तथा अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं –

– भारत में 6 से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त तथा अनिवार्य शिक्षा ।।

प्राथमिक शिक्षा खत्म होने से पहले किसी भी बच्चे को रोका नहीं जाएगा, निकाला नहीं जाएगा या बोर्ड परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं होगी । ऐसा बच्चा जिसकी उम्र 6 साल से ऊपर है, जो किसी स्कूल में दाखिल नहीं है अथवा है भी तो अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाया/पायी है, तब उसे उसकी उम्र के लायक उचित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा; बशर्ते कि सीधे तौर से दाखिला लेने वाले बच्चों के समकक्ष आने के लिए उसे प्रस्तावित समय सीमा के भीतर विशेष ट्रेनिंग दी। जानी होगी, जो प्रस्तावित हो । प्रारंभिक शिक्षा हेतु दाखिला लेने वाला बच्चा/बच्ची को 14 साल की उम्र के बाद भी प्रारंभिक शिक्षा के पूरा होने तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी । प्रारंभिक शिक्षा हेतु प्रवेश के लिए बच्चे की उम्र का निर्धारण उसके जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु तथा विवाह पंजीकरण कानून, 1856 या ऐसे अन्य कागजात के आधार पर किया जाएगा जो उसे जारी किया गया हो । उम्र प्रमाण नहीं होने को स्थिति में किसी भी बच्चे को दाखिला लेने से वंचित नहीं किया जा सकता ।
– प्रारम्भिक शिक्षा पूरा करने वाले छात्र को एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा ।
– एक निश्चित शिक्षक – छात्र अनुपात की सिफारिश;
जम्मू-कश्मीर को छोड़कर समूचे देश में लागू होगा; आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के लिए सभी निजी स्कूलों के कक्षा 1 में दाखिला लेने के लिए 25 प्रतिशत का आरक्षण; शिक्षा की गुणवत्ता में अनिवार्य सुधार; स्कूल शिक्षक को पांच वर्षों के भीतर समुचित व्यावसायिक डिग्री प्राप्त होनी चाहिए, अन्यथा उनकी नौकरी चली जाएगी; स्कूल का बुनियादी ढांचा 3 वर्षों के भीतर सुधारा जाए अन्यथा उसकी मान्यता रह कर दी जाएगी ।
– वित्तीय बोझ राज्य सरकार तथा केन्द्र सरकार के बीच साझा किया जाएगा ।

18.3.4 सरकार के उत्तरदायित्व

शिक्षा के अधिकार अधिनियम पर वित्त मंत्री श्री पी. चिदम्बरम ने कहा “It would be the legally enforceable duty of the center and the states to provide free and compulsory education”.
1. राज्य सरकार व स्थानीय सत्ता का दायित्व है कि वे जिन क्षेत्रों में विद्यालय नहीं हैं। अथवा पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं वहां तीन वर्ष की अवधि में विद्यालयों की स्थापना करें।
2. केन्द्र व राज्य सरकारें इस हेतु वित्तीय भार साझा रूप से उठायेगी । 3. केन्द्र सरकार इस अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु व्यय भार राशि का अनुमान लगायेगी।
4. केन्द्र सरकार राज्य सरकारों की सहायता सुझावों के माध्यम से समय समय पर राज्य सरकारों को वित्तीय अनुदान व सहायता प्रदान करेगी ।
5. केन्द्र सरकार राष्ट्रपति से अनुरोध करेगी कि राज्य सरकारों को दी जाने वाली अतिरिक्त वित्तीय सहायता की जाँच वित्त आयोग (अनुच्छेद 280 ) से करवाये ।।
6. राज्य/स्थानीय/उपर्युक्त सरकारें विद्यालय भवन, शैक्षणिक कर्मचारी, शिक्षण अधिगम, उपकरण उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करेगी । बालकों के प्रवेश उपस्थिति प्राथमिक शिक्षा के पूर्ण होने सम्बन्धित प्रक्रिया का पर्यवेक्षण करेगी । गुणवत्तायुक्त प्राथमिक शिक्षा के लिए अधिनियम में निर्धारित मानदण्डों को क्रियान्वित करवाने लिए उत्तरदायी होगी ।

विशेष टिप्पणी

राजस्थान में शिक्षा का अधिकार कानून को लागू करने के लिए केन्द्र से 14000 करोड़ रुपये की मांग की गई है । यह राशि 6 से 14 साल के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने पर खर्च होगी । शिक्षा मंत्री मास्टर भंवरलाल ने केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के साथ उच्च स्तरीय बैठक में अनिवार्य शिक्षा कानून को लागू करने पर चर्चा में यह मांग रखी । बैठक में शिक्षा मंत्री ने राज्य के मौजूदा शिक्षा की हालात ओर जरूरतों के बारे में बताया ।

सिब्बल ने भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पत्र के अनुसार राजस्थान की आरटीई के तहत स्कूल खोलने और शिक्षक भर्ती के लिए केन्द्र से कुल राशि का 75 प्रतिशत तक केन्द्रीय मदद के रूप में देने का प्रयास किया जाएगा । अभी राज्य को 65 और 25 के अनुपात में मदद मंजूर की है । सिब्बल ने कहा कि राज्य सरकार को सबसे पहले बैकलॉग के पदों को भरा जाना चाहिए | एक शिक्षक वाले स्कूलों में कम से कम दो शिक्षक लगाएं । राज्यों के शिक्षा मंत्रियों का सम्मेलन 18, 19 जून को दिल्ली में होगा ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *