विद्यालय शिक्षा एवं उच्च शिक्षा के बारे में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने क्या सिफारिशें दी हैं?

विद्यालय शिक्षा एवं उच्च शिक्षा के बारे में राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने क्या सिफारिशें दी हैं?

18.2.4 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिशों पर अनुवर्ती कार्यवाही राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की परिकल्पना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता 11वीं पंचवर्षीय योजना में परिलक्षित होती है | 11वीं पंचवर्षीय योजना में त्वरित व समान उन्नति प्राप्त करने के लिये शिक्षा को एक केन्द्रीय साधन के रूप में सर्वाधिक प्राथमिकता दी गई है ।।

(1) 11वीं पंचवर्षीय योजना में 3 ट्रिलियन रु. आवंटन का प्रस्ताव रखा गया है । जो 10वीं पंचवर्षीय योजना से चार गुना ज्यादा है । इस प्रकार कुल योजना में शिक्षा का हिस्सा 7.7 से बढ़कर 20 प्रतिशत हो जायेगा ।
(2) माध्यमिक स्तर पर सर्वसुलभता व गुणवत्ता की योजना के तहत 6000 नये उच्च स्तरीय मॉडल स्कूल खोले जायेंगे, प्रत्येक ब्लॉक में इस तरह का कम से कम एक स्कूल अवश्य होगा ।
(3) पहली धारा में सरकार द्वारा वित्त पोषित 2500 स्कूल खोले जायेंगे | 2000 केन्द्रीय । विद्यालय 500 नवोदय विद्यालय शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े ऐसे क्षेत्रों में खोले जाएंगे जहाँ अनु. जाति, जनजाति व पिछड़े वर्गों की आबादी की बहुलता है ।
(4) दूसरी धारा में लगभग 250 स्कूल सरकारी व निजी भागीदारी के माध्यम से अन्य ब्लाकों में खोले जायेंगे, जिनमें भौगोलिक, जनसांख्यिकीय, बालक-बालिका और सामाजिक समानता पर बल दिया जायेगा ।
(5) 11 वीं पंचवर्षीय योजना में 30 नये विश्वविद्यालय, 8 नए आईआईटी, 7 नये आईआईएम., 5 नए भारतीय विज्ञान संस्थान, 2 नियोजन और वास्तुकला स्कूल, 10 एनआईटी, 373 नए डिग्री कॉलेज, 1000 नये पोलीटेक्निक भी खोले जायेंगे ।
(6) यूजीसी, एआईसीटी, एमसीआई, एनसीटीई, वीसीआई जैसे विनियामक संस्थानों की पुनरीक्षा की जानी चाहिए साथ ही अनुसंधान में नवीनीकरण के लिये एक राष्ट्रीय विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड का प्रस्ताव किया गया है ।
(7) एक राष्ट्रीय अनुवाद मिशन स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है तथा इसके लिये 7397 करोड़ रूपये व्यय का प्रस्ताव है ।
(8) ई अभिशासन (E-Goverance) पर राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की सिफारिश का सरकार द्वारा समर्थन किया गया है ।

18.2.5 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग

राज्य स्तरीय पहले ऐसे अनेक विषय जिस पर राष्ट्रीय ज्ञान आयोग ने अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की हैं। राज्य सरकारों के क्षेत्राधिकार के अधीन आते हैं । अधिकांश सिफारिशों का क्रियान्वयन राज्य और जिला स्तरों पर किया जाना है । इस बात को ध्यान में रखते हुए ज्ञान आयोग राज्य स्तर पर ज्ञान पहलों को तैयार करने के लिए अनेक राज्य सरकारों के संपर्क में रहा है | अपनी सिफारिशों के कार्यान्वयन के लिए आयोग 26 राज्यों और 3 संघशासित क्षेत्रों के साथ काम कर रहा है । प्रमुख पहलों में निम्न शामिल हैं :- सभी राज्यों ने एनकेसी की सिफारिशें कार्यान्वित करने के लिए नोडल अधिकारियों और विभागों की नियुक्ति कर दी है । अनेक राज्य सरकारें ज्ञान आयोग की सिफारिशों पर आधारित सुधारों के लिए कार्य योजनाएं तैयार कर रही हैं जिनमें ये शामिल हैं: राजस्थान, उड़ीसा तथा आँन्ध्र प्रदेश । दिल्ली सरकार ने ज्ञान आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के लिए कार्ययोजना पहले ही मंजूर कर दी है। अनेक राज्य विश्वविद्यालयों पर कॉलेजों के संबंधन के भार को कम करने के लिए स्टेट बोर्ड ऑफ अंडर ग्रेजुएट एजूकेशन स्थापित करने का जायजा ले रहे हैं । इन बोर्डो का उद्देश्य शैक्षणिक कार्यों को प्रशासनिक कार्यों से अलग करने और गुणवत्ता बेंचमार्क उपलब्ध कराना है ।

कर्नाटक ने राज्य में ज्ञान क्षेत्र में सुधार के लिए बुनियादी कार्य करने के वास्ते एक ज्ञान आयोग शुरू कर दिया है । राजस्थान ने प्रक्रिया सुधार और ज्ञान आपूर्ति के लिए आईटी शिक्षा को बढ़ावा देने तथा आईटी प्रणालियों के अनुप्रयोग के वास्ते राजस्थान नालेज कार्पोरेशन लिमिटेड की स्थापना की है । राष्ट्रीय ई-अभिशासन परियोजना (एनईजीपी) के एक अंग के रूप में 6 राज्य सरकारों अर्थात हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडू, चंडीगढ़, दिल्ली तथा त्रिपुरा ने स्टेट वाइड
एरिया नेटवर्क कार्यान्वित किया है और 18 राज्यों में इसका कार्यान्वयन प्रगति पर है।

18.3 शिक्षा का अधिकार अधिनियम

18.3.1 शिक्षा का अधिकार का अर्थ

भारत के 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बालक को निःशुल्क व अनिवार्य रूप से प्राथमिक शिक्षा का अधिकार प्राप्त है ।।

• निःशुल्क शिक्षा:-

से तात्पर्य किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष राशि का नहीं लिया जाना | स्कूल फीस, एडमीशन फीस, यूनीफार्म, पाठ्य पुस्तकें, मिड डे मील, परिवहन आदि से सम्बन्धित किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जायेगा |

• अनिवार्य शिक्षा:-

से अर्थ देश के सभी बालकों के लिये शिक्षा उपलब्धता व सर्वसुलभता। 6 वर्ष से 14 वर्ष तक बालक अपने पड़ोस के किसी भी प्रकार (सरकारी अनुदानित, निजी, स्वायत्तशाषी) के विद्यालय में प्रवेश लेकर प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं । कम से कम प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर अनिवार्य रूप से सभी बालकों को मिले जिससे कि देश का प्रत्येक नागरिक शिक्षित हो सके । शिक्षा के समान अवसर देश के सभी बालकों को प्राप्त हो सकें ।

• प्रारंभिक शिक्षा:-

कक्षा प्रथम से कक्षा आठ तक की शिक्षा । • बालक (Child) 6 वर्ष से 14 वर्ष तक के लड़के व लड़कियाँ ।

विद्यालय (School):-

मान्यता प्राप्त राजकीय, स्थानीय, अनुदानित, गैर अनुदानित, निजी विदयालय | • विशेषीकृत श्रेणी “विद्यालय” केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल ।

18.3.2 अधिनियम बनने व लागू होने की प्रक्रिया

शिक्षा के अधिकार का स्वप्न हमारे संविधान निर्माताओं द्वारा देखा गया था जो भारत को एक प्रभुत्व सम्पन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य के साथ-साथ एक विकसित व सुशिक्षित राष्ट्र के रूप में देखना चाहते थे । इसके लिये हमारे संविधान के अध्याय चार में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में राज्य के दायित्व स्पष्ट करते हुए राज्य द्वारा अपने नागरिकों को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने सम्बन्धी लक्ष्य निर्देशित किया गया । इन्हीं लक्ष्यों में शिक्षा के अधिकार की भावना परिलक्षित होती है । इस स्वप्न का लक्ष्य व प्राप्ति देश की स्वतंत्रता के साठवें वर्ष में हुई । शिक्षा के अधिकार हेतु प्रयास इस प्रकार रहे शिक्षा के अधिकार को संवैधानिक आधार प्रदान करने के लिये दिसम्बर 2002 में 86 वां संविधान संशोधन द्वारा अनुच्छेद 21 A (भाग-iii) जोड़ा गया जिसके अन्तर्गत शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया ।

इस अधिनियम सम्बन्धी कच्चा दस्तावेज सर्वप्रथम 2005 में तैयार किया गया ।
– प्रारम्भ में अलाभान्वित व शिक्षा से वंचित रह रहे गरीब बालकों हेतु निजी विद्यालयों में 25% आरक्षण प्रदान किया गया

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