राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की परिकल्पना स्पष्ट कीजिए ?

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की परिकल्पना स्पष्ट कीजिए ?

यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है । इसके लिये संसाधनों व समय के साथ-साथ एक साहसपूर्ण कल्पना और तीव्र कार्यान्वयन के आधार पर भी बल दिया जाना आवश्यक होगा । इसलिए साहसपूर्ण परिकल्पना की क्रियान्विति राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के गठन के रूप में की गई ।

18.2.1 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के उद्देश्य |

1. विश्व में हो रहे ज्ञान के विस्फोट को देखते हुए भारत में ज्ञान की संभावनाओं का पता लगाना ।
2. भारत में ज्ञान को एक संसाधन के रूप में विकसित करने हेतु अध्ययन करना एवं सुझाव देना ।
3. मानव संसाधन के क्षेत्र में भारत को एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित करना ।
4. भारत को एक ज्ञानवान देश व एक ज्ञानवान समाज की ओर अग्रसर करना ।
5. भारत को आने वाली वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की दृष्टि से सक्षम बनाना ।
6. भारत की मानवपूँजी (युवा पीढ़ी) को सामर्थ्यवान बनाना ।।
7. ज्ञान सम्बन्धी संसाधनों के विकास हेतु आधारिक तंत्र में सुधार की एक कार्य योजना तैयार करना।
8. भारत के विशाल ज्ञान भण्डार का लाभ उठाने के लिये एक कार्य योजना बनाना ।
9. समावेशी उन्नति के केन्द्रीय साधन के रूप में शिक्षा को उच्च प्राथमिकता देना व शिक्षा के प्रति जागरूकता का विकास करना ।
10. पिछड़े व उपेक्षित क्षेत्रों – जैसे कृषि, परम्परागत चिकित्सा, पुस्तकालय, प्राविधिक शिक्षा आदि के नवीनीकरण हेतु प्रयासों की दिशा तय करना ।

18.2.2 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का गठन

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की स्थापना भारत के प्रधानमंत्री के उच्च स्तरीय सलाहकार निकाय के रूप में की गई थी । आयोग की कल्पना भारत के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह द्वारा निम्न शब्दों में अभिव्यक्त की गई थी – “अब समय आ गया है कि संस्थान निर्माण का दूसरा दौर शुरू किया जाये और शिक्षा अनुसंधान और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल की जाये” कार्यकाल : ज्ञान आयोग का गठन 13 जून 2005 को किया गया । इस आयोग का कार्यकाल 3 वर्ष रखा गया । प्रारम्भ में 2 अक्टूबर 2008 तक इसका कार्यकाल रखा गया । बाद में इसे 31 मार्च 2009 तक बढ़ा दिया गया । इस प्रकार आयोग का कार्यकाल लगभग 4 वर्ष का रहा। संगठन: ज्ञान आयोग में इसके अध्यक्ष सहित आठ सदस्यों को शामिल किया गया । इसके सभी सदस्य इस प्रकार थे।

डॉ. सैम पित्रोदा। डॉ. पी. बलराम डॉ. अशोक गाँगुली डॉ. जयंती घोष डॉ. दीपक नैय्यर डॉ. नंदन नीलेकनी डॉ. अमिताभ मटटू डॉ. सुजाता रामदौराई आयोग की सहायता हेतु कार्यकारी निदेशक तकनीकी कर्मचारी, विशेष कार्य हेतु अधिकारी विशेषज्ञ भी संगठन में सम्मिलित किये गये । प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक अध्यक्ष राष्ट्रीय समूह का गठन भी किया गया । जिसमें केन्द्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग, सूचना एवं संचार, विज्ञान एवं तकनीकी राज्य मंत्री व योजना आयोग के उपाध्यक्ष को भी सम्मिलित किया गया । नियोजन और बजट के साथ-साथ संसद सम्बन्धी कार्यों एवं दायित्वों को संभालने के लिये आयोग की नोडल एजेंसी योजना आयोग को बनाया गया । ज्ञान आयोग के संगठन को निम्नांकित चित्र द्वारा भली भांति समझा जा सकता है ।
प्रधानमंत्री
योजना आयोग
रा, ज्ञा. आ.
अध्यक्ष
मंत्री/राज्य
(सदस्य)
तकनीकी व विशेष कार्यकारी
स्टॉफ प्रविधि: राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की कार्य विधि इस प्रकार रही –
• प्रमुख चिन्हित क्षेत्रों की पहचान ।
• विविध हितधारकों की पहचान और क्षेत्र में प्रमुख मुद्दों को समझना ।
• कार्य दलों का गठन तथा कार्यशालाओं/संगोष्ठियों का आयोजन करना, संबंधित विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ विस्तृत औपचारिक और अनौपचारिक परामर्श करना ।
• प्रशासनिक मंत्रालयों और योजना आयोग के साथ परामर्श ।

प्रधानमंत्री को भेजे जाने वाले पत्र में सिफारिशों को अंतिम रूप देने के वास्ते आयोग में चर्चा ।।
राज्य सरकारों, सामाजिक संगठन तथा अन्य हितधारियो के बीच सिफारिशों का प्रसार
प्रधानमंत्री कार्यालय के तत्वावधान में सिफारिशों का कार्यान्वयन शुरू करना ।
• प्रस्तावों के कार्यान्वयन का समन्वय और अनुवर्ती कार्रवाई ।

स्वमूल्यांकन प्रश्न

2. राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के गठन के उद्देश्य क्या रहे ?
3. राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का गठन किस प्रकार किया गया ?

18.2.3 राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की प्रमुख सिफारिशें ।

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग द्वारा तीन वर्षों में प्रधानमंत्री को भेजे गये पत्रों के रूप में 27 ध्यातव्य क्षेत्रों पर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की गई । ये सिफारिशें तीन संकल्पनाओं – राष्ट्र के नाम प्रतिवेदन – 2006, राष्ट्र के नाम प्रतिवेदन – 2007, एक ज्ञानवान समाज की ओर” में संकलित की गई है । इन सिफारिशों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है –
1. शिक्षा का अधिकारः देश के सभी बच्चों को उत्तम स्कूली शिक्षा प्रदान करने के लिये राष्ट्रीय स्तर पर एक कानून बनाया जाना चाहिये । इस हेतु अतिरिक्त धनराशि केन्द्र सरकार को देनी चाहिये । 3 वर्ष की अवधि मॉडल विधेयक को लागू करने हेतु देनी चाहिये । सर्वसुलभ स्कूली शिक्षा के तहत वंचित, भूमिहीन, अल्पसंख्यक समुदाय, अपंगता व विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी स्कूली शिक्षा प्रदान करना चाहिये । शिक्षकों के लिये भी न्यूनतम योग्यता व लचीले नियम तय किये जाने चाहिये ।।
ज्ञान पंचभुज
ज्ञान के सिद्धान्त
ज्ञान की सुलभता
सेवाएँ प्रदान करने की व्यवस्था
ज्ञान की रचना
ज्ञान का उपयोग

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग द्वारा उपरोक्त पांच क्षेत्रों पर अध्ययन किया गया व उन्होंने लगभग 28 विषयों से सम्बन्धित 300 सिफारिशें प्रस्तुत की हैं ।

2. भाषा :

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग का यह मानना है कि भाषा न सिर्फ सिखाने का, बातचीत के माध्यम के रूप में महत्वपूर्ण है बल्कि ज्ञान और विभिन्न सेवाओं की सुलभता निश्चित करने में इसकी प्रमुख भूमिका है । रा.ज्ञा.आ. की सिफारिश है कि स्कूल में पहली कक्षा से बच्चे की पहली भाषा (मातृ या क्षेत्रीय) के साथ अंग्रेजी भाषा की पढ़ाई शुरू की जानी चाहिये । इसे स्कूली पाठ्यक्रम में समाहित किया जाना चाहिये । तीसरी कक्षा से अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किसी गैर भाषाई विषय को पढ़ाने के लिये भी किया जाना चाहिये । अंग्रेजी भाषी शिक्षकों की आवश्यकता को पूरा करने के लिये भाषा में दक्ष व संवाद कौशल में प्रवीण स्नातकों को औपचारिक शिक्षक प्रशिक्षण देकर भर्ती किया जाना चाहिये ।

3. अनुवाद :

डॉ. जयंती घोष की अध्यक्षता में एक कार्यकारी दल ने इस विषय पर विस्तृत कार्य किया जिसके अध्ययन के आधार पर रा.इ.आ. की मुख्य सिफारिशें इस प्रकार हैं – देश में अनुवाद को उद्योग के रूप में विकसित करने पर बढ़ावा देना ।

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